हर साल लाखों श्रद्धालुओं के मन में एक ही सवाल उठता है अक्षय तृतीया कब है? या आखा तीज कब है? तो आइए इस लेख में जानते हैं अक्षय तृतीया 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पावन पर्व से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।
अक्षय तृतीया 2026 – तिथि और मुहूर्त (Akshaya Tritiya Kab Hai)
जो लोग जानना चाहते हैं कि akshaya tritiya kab hai या आखा तीज कब है, उनके लिए बता दें।
द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल 2026, रविवार को प्रातः 10 बजकर 49 मिनट पर होगा और इसका समापन 20 अप्रैल 2026 को प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा।
उदया तिथि के अनुसार, अक्षय तृतीया 2026 का पर्व 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।
सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: 19 अप्रैल प्रातः 10:49 से 20 अप्रैल प्रातः 06:14 तक
अक्षय तृतीया क्या है और इसका क्या अर्थ है?
सनातन परंपरा में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं, जो जीवन-दर्शन का जीवंत संदेश देती हैं। अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज या अक्ती तीज भी कहते हैं, ऐसी ही एक परम पावन तिथि है।
यहाँ “अक्षय” शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, जो सदा बना रहे, जो अनंत हो। यही कारण है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है।
यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है और आत्मिक उन्नति, धर्म, सेवा तथा सद्कर्म की कभी न समाप्त होने वाली परंपरा का स्मरण कराता है।
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
अक्षय तृतीया 2026 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि इतिहास और पुराणों में इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुई हैं।
- युगादि तिथि: हिंदू काल-गणना के अनुसार, इसी दिन सतयुग का समापन हुआ था और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। इसीलिए इसे “युगादि तिथि” भी कहा जाता है।
- परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम का प्राकट्य इसी तिथि को हुआ था।
- गंगा अवतरण: भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे समस्त जीवों का उद्धार संभव हुआ।
- अक्षय पात्र की प्राप्ति: महाभारत काल में वनवास के दौरान सूर्यदेव ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई।
- सुदामा और कृष्ण का मिलन: द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नाश इसी पावन तिथि पर किया था।
अबूझ मुहूर्त – बिना पंचांग देखे करें शुभ काम
आखा तीज की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नया व्यापार आरंभ, वाहन क्रय, आभूषण खरीदना जैसे सभी मांगलिक कार्य इस दिन स्वतः सिद्ध माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्ष में कुछ ही तिथियाँ ऐसी होती हैं जो समस्त अशुभ प्रभावों से मुक्त मानी जाती हैं, और अक्षय तृतीया उनमें सबसे प्रमुख है।
अक्षय तृतीया पर सोना क्यों खरीदें?
अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी एक प्राचीन और शुभ परंपरा है। वैदिक काल से ही स्वर्ण को केवल एक धातु नहीं, बल्कि साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। चूँकि यह “अक्षय” तिथि है, इसलिए मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए स्वर्ण का कभी क्षरण नहीं होता और घर में समृद्धि बनी रहती है।
सोना खरीदने का शुभ समय: 19 अप्रैल 2026 प्रातः 10:49 से 20 अप्रैल 2026 प्रातः 06:14 तक।
अक्षय तृतीया 2026 पर दान का महत्व
शास्त्रों में वर्णित है:
अक्षय तृतीयायां दानं, पुण्यं च न क्षीयते।
(अर्थात् अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान और अर्जित पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।)
इस दिन दान करने से धन का ह्रास नहीं होता, बल्कि धन-संपदा में वृद्धि होती है। दान के कुछ प्रमुख रूप इस प्रकार हैं।
अन्न दान: अन्नदानम् परं दानम् किसी भूखे को भोजन कराना साक्षात नारायण की सेवा के समान है। ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ में सत्तू, गुड़ और शीतल जल के दान का विशेष महत्व है।
जल दान: प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ी मानवता है। मिट्टी के घड़े में जल भरकर दान करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।
वस्त्र दान: निर्धनों को तन ढकने के लिए वस्त्र दान करें।
पादुका दान: इस तपती गर्मी में राहगीरों को जूते या चप्पल दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
गौ दान: ब्राह्मणों को गौदान करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं है। यह अहंकार का विसर्जन है। यह आत्मा को निर्मल करता है और कर्मों की श्रृंखला में ऐसे बीज बोता है, जिनका फल जन्म-जन्मांतर तक अक्षय रहता है।
अक्षय तृतीया 2026 की पूजा विधि
अक्षय तृतीया 2026 का पर्व भगवान विष्णु के लक्ष्मीनारायण स्वरूप तथा धन के देवता कुबेर को समर्पित है। पूजा विधि इस प्रकार करें।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- संकल्प लें स्नान के पश्चात हाथ में जल लेकर व्रत या विशेष पूजा का संकल्प करें।
- पूजन करें भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा को पीले पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें।
- भोग लगाएँ भगवान को सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और फलों का भोग अर्पित करें।
- मंत्र जप करें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का यथाशक्ति जप करें।
- दान करें पूजा के अंत में जरूरतमंद लोगों को और ब्राह्मणों को भोजन व दान-दक्षिणा दें।
अक्षय तृतीया 2026 पर क्या करें?
इस पावन दिवस पर ये कार्य विशेष रूप से करने चाहिए।
- श्री लक्ष्मीनारायण की विधिपूर्वक पूजा करें
- भगवान कुबेर की पूजा करें
- गंगा या अन्य पवित्र तीर्थों में स्नान करें
- हवन एवं वेद-स्वाध्याय करें
- स्वर्ण, आभूषण या सिक्कों की खरीदारी करें
- विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य सम्पन्न करें
- जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान करें
निष्कर्ष
संसार में सब कुछ नश्वर है, सिवाय हमारे द्वारा किए गए सत्कर्मों के। अक्षय तृतीया कब है यह जानना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इस दिन का सदुपयोग करना। सोना खरीदना समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन किसी दुखी के आँसू पोंछना और किसी भूखे को अन्न खिलाना उस समृद्धि को सच में “अक्षय” बनाता है।
इस आखा तीज 2026 पर केवल अपने लिए वैभव न माँगें, बल्कि संसार के समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना करें। सेवा, सुमिरन और समर्पण के पथ पर आगे बढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न: अक्षय तृतीया कब है (Akshaya Tritiya kab hai) 2026 में?
उत्तर: अक्षय तृतीया 2026, 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को प्रातः 10:49 बजे होगा।
प्रश्न: अक्षय तृतीया पर किसकी पूजा होती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान लक्ष्मीनारायण और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।
प्रश्न: अक्षय तृतीया 2026 पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 19 अप्रैल 2026 प्रातः 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026 प्रातः 06:14 बजे तक।
प्रश्न: अक्षय तृतीया 2026 पर क्या दान करें?
उत्तर: अन्न, जल, वस्त्र, पादुका और गौदान इस दिन विशेष पुण्यकारी माने जाते हैं।

I am Palmist Harsha, a professional palmist with over six years of experience in teaching and practicing palmistry. I hold a Diploma in Palmistry and a Master’s degree in Palmistry, which have helped me understand this ancient art in depth.
Over the years, I have guided many students and individuals in reading and understanding the lines, shapes, and patterns of the hand. My goal is to help people discover their personality, emotions, and life direction through the wisdom of palmistry.
I believe that every hand tells a unique story. Through my readings and classes, I aim to make palmistry simple, practical, and meaningful for everyone. Teaching this subject has been one of my greatest joys, as it allows me to share my knowledge and connect with people on a deeper level.

